घरों में इस्तेमाल होने वाला रसोई गैस (LPG) सिलेंडर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सिलेंडर की ऊपरी मेटल रिंग (हैंडल वाली पट्टी) पर A-24, B-26, C-25 या D-27 जैसे कोड लिखे देखे हैं? अधिकतर लोग इसे कोई साधारण नंबर समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन असल में यह आपकी सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जानकारी होती है।
क्या होता है सिलेंडर पर लिखे इस खास कोड का मतलब?
LPG सिलेंडर की ऊपरी पट्टी पर लिखा यह कोड सिलेंडर की अगली सुरक्षा जांच (Safety Test / Hydro Test) की तारीख को दर्शाता है। चूंकि सिलेंडर के भीतर गैस बेहद उच्च दबाव (High Pressure) पर भरी होती है,
इसलिए एक निश्चित समय के बाद इनकी दोबारा टेस्टिंग करना अनिवार्य होता है। यह कोड दो भागों में बंटा होता है एक अक्षर (Letter) और दो अंक (Numbers)।
जानिए कोड में लिखे ‘A, B, C, D’ का असली गणित
कोड का पहला अक्षर यह बताता है कि सिलेंडर का टेस्ट साल की किस तिमाही (Quarter) में होना निर्धारित है:
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A: जनवरी से मार्च (Quarter 1)
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B: अप्रैल से जून (Quarter 2)
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C: जुलाई से सितंबर (Quarter 3)
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D: अक्टूबर से दिसंबर (Quarter 4)
अंकों में छिपा है टेस्टिंग का साल
अक्षर के ठीक बाद लिखे दो अंक उस वर्ष को दर्शाते हैं, जिसमें सिलेंडर को टेस्टिंग लैब भेजा जाना है।
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उदाहरण के लिए: यदि आपके सिलेंडर पर D-27 लिखा है, तो इसका मतलब है कि इस सिलेंडर का अगला सुरक्षा परीक्षण अक्टूबर से दिसंबर 2027 के बीच होना है।
इसी तरह, अगर किसी सिलेंडर पर A-24 लिखा है, तो उसकी टेस्टिंग अवधि मार्च 2024 में ही समाप्त हो चुकी है।
एक्सपायर या ओवरड्यू सिलेंडर क्यों है खतरनाक?
अपनी निर्धारित परीक्षण अवधि पार कर चुके सिलेंडरों का उपयोग करना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा हो सकता है। पुराना या बिना जांच वाला सिलेंडर हाई प्रेशर सहन करने में असमर्थ हो सकता है, जिससे गैस लीक होने या दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
जरूरी सलाह: जब भी डिलीवरी बॉय आपके घर एलपीजी सिलेंडर देने आए, तो रेगुलेटर लगाने से पहले उसकी पट्टी पर लिखे इस सुरक्षा कोड को जरूर चेक करें। अगर उस पर लिखी टेस्टिंग की तारीख बीत चुकी है, तो ऐसा सिलेंडर लेने से तुरंत इंकार कर दें और गैस एजेंसी से इसे बदलने को कहें।